आज फिर एक बच्चे के रोड दुर्घटना में मरने की खबर पढ़ी तो फिर पुरानी बातें याद आने लगी जब मैं और मेरी छोटी बहन लूना चलाते थे तब पापा ने हमको प्लग साफ़ करना ब्रेक टाइट करना सब सिखाया वो कहते थे की जब गाड़ी चला रहे हो तो सारी जानकारी खुद को होना चाहिए ,फिर हमने कार सीखने की जिद की तब पापा ने पहले कागज पेन ले कर हमको सारी बात समझाई की कार चलाते समय क्या क्या बात पर हमारा ध्यान होना चाहिए , कितनी स्पीड पर कौन सा गेयर लगाना चाहिए ,चढ़ाई पर कौन सा और ढलान पर कौन सा गेयर लगाना चाहिए कब हेंड ब्रेक लगाना चाहिए ,जब सारी बाते समझा दी तब रोज मुझको और छोटी बहन को ले कर कार चलवाने जाते थे रोज रात को हमारा यही काम था की कार चलायें एक दिन कार अन्दर लाते समय कार की एक तरफ रगड़ खा गयी मैं बहुत डर गयी की अब पापा डांटेंगे क्यूंकि वो अपनी गाड़ियों को बहुत प्यार करते थे ,पर पापा ने समझाया की कार अन्दर ले जाते समय किस तरफ ज्यादा मोड़ना है पीछे करते समय कैसे मोड़ना है और मुझसे बार बार कार अन्दर बाहर करवाते रहे जब तक मुझे ठीक से अंदाज नहीं हो गया .फिर हम लोग जब कार सीख गए तब पापा ने स्टेशन जाते टाइम हम लोगो को ही बोलना शुरू किया की तुम लोग छोड़ कर आओ मम्मी टोकती थी की अरे इतनी रात को लड़कियां अकेली कैसे आएँगी तब पापा कहते थे की कार में आना है उनको और मेरी बेटियां बहुत बहादुर है .हम लोग उनको स्टेशन छोड़ कर कितनी भी रात हो अकेले आ जाते थे कार ख़राब होने का भी डर नहीं था क्यूंकि पंक्चर होने पर कैसे टायर बदलना है ये भी हमको सिखाया गया था .कुछ दिन पहले ही मैं और दीदी, जीजाजी के साथ बाजार गए थे वापसी में टायर पंक्चर हो गया जीजाजी उसी टाइम बीमारी से उठे थे तो मैंने और दीदी ने टायर बदल दिया .आज के माता पिता बच्चों की जिद पर उनको गाड़ी चलाने दे देते है पर किन बातों का ध्यान रखना है ये नहीं समझाते .मैंने एक बार पापा को कहा की पापा मुझे अभी तक कार चलाने में कॉन्फिडेंस नहीं आया है तब पापा बोले की बेटा मुझे पचास साल हो गए और कॉन्फिडेंस नहीं आया है और अच्छा है की डर कर चलो कम से कम सुरक्षा तो रहेगी क्यूंकि आप तेज चलो या धीरे मुश्किल से कुछ मिनट्स का फर्क पड़ता है इसलिए धीरे चलो और सुरक्षित चलो .पापा की एक बात और ध्यान देने वाली है पापा कहते थे जो अपने घोड़े की जितनी सेवा करेगा उसका घोडा भी उसको उतना सुख देगा इसलिए अपने घोड़े यानि की अपने वाहन की सेवा करो मतलब उसका ध्यान रखो तभी वाहन का सुख भी मिलेगा .
शुक्रवार, 26 जुलाई 2013
आज फिर एक बच्चे के रोड दुर्घटना में मरने की खबर पढ़ी तो फिर पुरानी बातें याद आने लगी जब मैं और मेरी छोटी बहन लूना चलाते थे तब पापा ने हमको प्लग साफ़ करना ब्रेक टाइट करना सब सिखाया वो कहते थे की जब गाड़ी चला रहे हो तो सारी जानकारी खुद को होना चाहिए ,फिर हमने कार सीखने की जिद की तब पापा ने पहले कागज पेन ले कर हमको सारी बात समझाई की कार चलाते समय क्या क्या बात पर हमारा ध्यान होना चाहिए , कितनी स्पीड पर कौन सा गेयर लगाना चाहिए ,चढ़ाई पर कौन सा और ढलान पर कौन सा गेयर लगाना चाहिए कब हेंड ब्रेक लगाना चाहिए ,जब सारी बाते समझा दी तब रोज मुझको और छोटी बहन को ले कर कार चलवाने जाते थे रोज रात को हमारा यही काम था की कार चलायें एक दिन कार अन्दर लाते समय कार की एक तरफ रगड़ खा गयी मैं बहुत डर गयी की अब पापा डांटेंगे क्यूंकि वो अपनी गाड़ियों को बहुत प्यार करते थे ,पर पापा ने समझाया की कार अन्दर ले जाते समय किस तरफ ज्यादा मोड़ना है पीछे करते समय कैसे मोड़ना है और मुझसे बार बार कार अन्दर बाहर करवाते रहे जब तक मुझे ठीक से अंदाज नहीं हो गया .फिर हम लोग जब कार सीख गए तब पापा ने स्टेशन जाते टाइम हम लोगो को ही बोलना शुरू किया की तुम लोग छोड़ कर आओ मम्मी टोकती थी की अरे इतनी रात को लड़कियां अकेली कैसे आएँगी तब पापा कहते थे की कार में आना है उनको और मेरी बेटियां बहुत बहादुर है .हम लोग उनको स्टेशन छोड़ कर कितनी भी रात हो अकेले आ जाते थे कार ख़राब होने का भी डर नहीं था क्यूंकि पंक्चर होने पर कैसे टायर बदलना है ये भी हमको सिखाया गया था .कुछ दिन पहले ही मैं और दीदी, जीजाजी के साथ बाजार गए थे वापसी में टायर पंक्चर हो गया जीजाजी उसी टाइम बीमारी से उठे थे तो मैंने और दीदी ने टायर बदल दिया .आज के माता पिता बच्चों की जिद पर उनको गाड़ी चलाने दे देते है पर किन बातों का ध्यान रखना है ये नहीं समझाते .मैंने एक बार पापा को कहा की पापा मुझे अभी तक कार चलाने में कॉन्फिडेंस नहीं आया है तब पापा बोले की बेटा मुझे पचास साल हो गए और कॉन्फिडेंस नहीं आया है और अच्छा है की डर कर चलो कम से कम सुरक्षा तो रहेगी क्यूंकि आप तेज चलो या धीरे मुश्किल से कुछ मिनट्स का फर्क पड़ता है इसलिए धीरे चलो और सुरक्षित चलो .पापा की एक बात और ध्यान देने वाली है पापा कहते थे जो अपने घोड़े की जितनी सेवा करेगा उसका घोडा भी उसको उतना सुख देगा इसलिए अपने घोड़े यानि की अपने वाहन की सेवा करो मतलब उसका ध्यान रखो तभी वाहन का सुख भी मिलेगा .
गुरुवार, 2 मई 2013
मेरा बेटे को जब तकलीफ होती है तब मै परेशान होती हूँ परन्तु फिर पापा की याद आती है जब ऐश्वर्य होने वाला था तब डॉक्टर ने मुझको सीढ़ी चड़ने से मना कर दिया परन्तु उस समय हमारे पास दो ही बेड थे और बेडरूम ऊपर था ,बेड फिक्स थे जिनको नीचे लाना मुश्किल था , पापा उस समय मेरे पास ही थे वो हमको रोज कहते थे की दो बेड ले आओ और नीचे के रूम मै लगा लो ऊपर के रूम मै मत जाओ पर हम लोग आलस के कारण रोज टाल रहे थे और मै ऊपर के रूम मै ही चली जाती थी फिर पापा बिलासपुर से वापस जबलपुर चले गए जाने के दुसरे दिन ही फ़ोन आया की पापा बस से फिर बिलासपुर आ रहे है हम लोग सोच मै पड़ गए की इतनी जल्दी पापा वापस क्यूं आ रहे है जब पापा घर पहुचे तब देखा की पापा जबलपुर के घर मै रखे पुराने बेड बस से ले कर आ गए बोले की मुझे पता है तुम लोग व्यस्त रहते हो बाजार जाने का समय भी नहीं है इसलिए मै ही जबलपुर से बेड ले आया अब नीचे के रूम में रहा करो ऊपर के रूम में जाना एकदम बंद करो क्यूंकि डॉक्टर ने तुमको मना किया है मेरे तो आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे हम लोग इस उम्र में बाजार तक जाने में आलस कर रहे थे और पापा ६५ की उम्र में बिलासपुर से जबलपुर गए रात भर का सफ़र करने के बाद भी तुरंत बिना आराम किये बस वाले से बात करके बेड ले कर दुसरे दिन ही बिलासपुर पहुच गए वो भी सिर्फ इसलिए की मुझे तकलीफ ना हो इतना बेटियों का इतना ख्याल रखने वाले पापा बहुत कम होते है
बुधवार, 17 अप्रैल 2013
आज प्लेन का टिकेट बुक करवाते हुए एक पुरानी बात फिर याद आ गयी मेरे भाई बहन साइंस और गणित विषय लिए थे में अकेली आर्ट्स ले कर पढ़ रही थी और क्लास में तीनो भाई बहन पहला रैंक लाते थे में अकेली थी जो क्लास में रैंक नहीं ला पाती थी बस १ श्रेणी ही मिलने पर खुश हो जाती थी ,इसलिए फ्यूचर के बारे में बहुत बड़ा प्लान नहीं बनाया था पर एक दिन पापा के विश्वास ने मेरी दुनिया ही बदल दी हुआ ये की मम्मी न्यूज़ पेपर पढ़ कर आह भर रही थी की कुछ लोग कितने अमीर और खुश किस्मत होते है की प्लेन में घूम सकते है एक हम है की प्लेन देखा भी नहीं मेने मम्मी के हाथ से पेपर ले कर कहा की मम्मी मै तुमको प्लेन में घुमा दूँगी सुनते ही भाई जोर से हंसा हा हा तुम क्या घुमाओगी सुनत ेही मै चुप हो गयी पर पापा ने तुरंत बोला की क्यं नहीं घुमा सकती जरूर घुमाएगी वो बड़ी ऑफिसर बनेगी और जरूर मम्मी को प्लेन मै ले जाएगी ये सुन कर मैने तुरंत ये पक्का वादा स्वयं से किया की मुझे अब बहुत मेहनत करनी है और पापा का विश्वास सच करना है और मैने उस दिन से ही कोशिश शुरू की और एक दिन जज के रूप मै चयनित हो गयी रायपुर से एक दिन मैने पापा और मम्मी की प्लेन की टिकेट चंडीगढ़ के लिए बुक करवा दी और उस दिन पापा को फ़ोन किया की आप दोनों जबलपुर से रायपुर आ जाओ मुझे अपना वादा पूरा करना है और मम्मी को प्लेन से भेजना है ,पापा बहुत खुश हुए और जा कर सारे रिश्ते दारों को बता आये की हमारी बेटी हमको प्लेन से भेज रही है पापा मम्मी के प्लेन मै जाने के बाद बहुत देर तक उस प्लेन को देखती खड़ी रही और पापा की बात कान मे गूंजती रही की ये बड़ी ऑफिसर बनेगी और जरूर मम्मी को प्लेन मे घुमाएगी
मंगलवार, 16 अप्रैल 2013
एक बात पापा की बहुत अच्छी थी की वो हम बच्चों को बहुत कम डाँटते थे मुझे याद है जब हम चारों भाई बहन लड़ाई करने के बाद उनके पास शिकायत करने जाते थे तब वो कहते थे की एक के बाद एक अपनी बात कहो सबसे छोटी बहन पहले शुरू करती थी जब हम में से कोई बीच में बोलने की कोशिश करे तब पापा कहते थे की जब तुम्हारा नंबर आएगा तब कहना और जब तक हमारा नंबर आता तब तक सबका गुस्सा शांत हो चूका रहता और किसी दुसरे विषय पर बात चलने लगती थी पापा जज थे और कोर्ट में यही तरीका अपनाया जाता है दो एडवोकेट्स की लड़ाई रोकने के लिए की पहले एक अपनी बात पूरी करे फिर दुसरे की बात शुरू हो जिससे वादविवाद की नौबत नहीं आती ,उनकी ये बात मेरे काम करने में बहुत मददगार है .मेरी कोर्ट में वादविवाद बहुत कम होता है .
बुधवार, 3 अप्रैल 2013
पापा की सोच बहुत ही आशावादी थी एक बार छोटी बहन की चप्पल मंदिर से चोरी चली गयी हम दोनों बहुत दुखी हो गए की घर पर क्या कहेंगे डरते डरते जब घर पर बताया तब पापा ने हम दोनों को कहा की बस अब तुम्हारे सारे दुःख भगवन ने चोरी कर लिए मतलब दूर कर दिए अब सब अच्छा ही होगा और हुआ भी ऐसा ही छोटी बहन इंडियन टेलिकॉम सर्विस में चयनित हो गयी .बड़ी से बड़ी मुसीबत में भी पापा यही कहते की इशवर इच्छा से सब ठीक ही होगा .अपनी बेटियों पर पापा बहुत भरोसा करते थे मुझे याद है जब हमारा ट्रांसफर उमरिया से मंडला हुआ तब गर्ल्स कॉलेज में हिस्ट्री सब्जेक्ट नहीं था इसलिए मुझे ले कर पापा दूसरे कॉलेज गए वहां पता लगा की आर्ट्स में कोई लड़की नहीं है और करीब अस्सी नब्बे लड़के है मेरा तो डर के मारे दम ही निकल गया पर पापा ने प्रिंसिपल से कहा की मेरी बेटी बहुत बहादुर है वो जरूर पढेगी और मेरा एडमिशन करवा दिया और रोज मेरी हिम्मत बढ़ाते रहे इस कारण ही मै उस कॉलेज में तीन साल तक पढ़ सकी और उस अकेले पढने का असर ये हुआ की जिंदगी में बड़े से बड़े शहर यहाँ तक की लन्दन तक अकेले जाने की हिम्मत कर ली काश सब लड़कियों को ऐसे ही पापा मिलते तो हमारे भारत की तस्वीर ही कुछ और होती
एक मजेदार किस्सा
मेरी पोस्टिंग पहली बार छत्तीसगढ़ के शहर में हुई तब मुझे यहाँ की भाषा बिलकुल नहीं आती थी एक मजेदार किस्सा याद आ रहा है हमने वाइट वाश के लिए मजदूर बुलवाया उसने आ कर पुछा का ला का ला पोतने है मैंने बोला की अरे काला नहीं सफ़ेद पोतना है वो हैरानी से मुझे देखने लगा और फिर दोहराया की का ला का ला पोतने है मैंने उसको गुस्से में कहा की बोला न सफ़ेद पोतना है तभी मेरा चोकीदार जो सब सुन रहा था ने आ कर कहा की साहब ये पूछ रहा है की का ला मतलब कहाँ कहाँ पोतना है सुनते ही हंसी के मारे बुरा हाल हो गया इस तरह भाषा बदलने से मजेदार किस्से ने जनम लिया
मेरी पोस्टिंग पहली बार छत्तीसगढ़ के शहर में हुई तब मुझे यहाँ की भाषा बिलकुल नहीं आती थी एक मजेदार किस्सा याद आ रहा है हमने वाइट वाश के लिए मजदूर बुलवाया उसने आ कर पुछा का ला का ला पोतने है मैंने बोला की अरे काला नहीं सफ़ेद पोतना है वो हैरानी से मुझे देखने लगा और फिर दोहराया की का ला का ला पोतने है मैंने उसको गुस्से में कहा की बोला न सफ़ेद पोतना है तभी मेरा चोकीदार जो सब सुन रहा था ने आ कर कहा की साहब ये पूछ रहा है की का ला मतलब कहाँ कहाँ पोतना है सुनते ही हंसी के मारे बुरा हाल हो गया इस तरह भाषा बदलने से मजेदार किस्से ने जनम लिया
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